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सूर्य नमस्कार कि सम्पूर्ण विधि तथा इससे होने वाले लाभ - अंतराष्ट्रीय योग दिवस विशेष
Neeraj Yadav

सूर्य नमस्कार कि सम्पूर्ण विधि तथा इससे होने वाले लाभ - अंतराष्ट्रीय योग दिवस विशेष

21-Jun-2016 | | Total View : 0 |

आज की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में इंसान इतना वयस्त हो गया है, की उसके पास अब अपने लिए समय ही नहीं बचा है। अगर पहले समय के लोगो ओर अब के समय के लोगो की जीवन शैली को देखा जाये तो आज का इंसान इतना वयस्त हो गया है की उसको अपनी शारीरिक ओर मानसिक विकार के विषय में सोचने के लिए समय ही नहीं बचा है।
यदि आपके पास समय की कमी है, और आप चुस्त दुरुस्त रहने का कोई नुस्ख़ा ढूँढ रहे हैं, तो वह आपको यहाँ मिल जाएगा I
सूर्य नमस्कार 12 शक्तिशाली योग आसनों का एक समन्वय है, जो एक उत्तम कार्डियो-वॅस्क्युलर व्यायाम भी है।

21 जून को होने वाले "इंटरनेश्नल योगा डे" की चर्चा पूरे विश्व में है। भले ही, योगा डे पर सूर्य नमस्कार (योगासन) करने को लेकर भारत में बवाल मच रहा हो, राजनेताओं और हिंदू-मुस्लिम संगठन बयानबाज़ी चल रही हो पर इन विवादों को दरकिनार कर देखा जाए तो योगासन के अनेक फायदे हैं। हम आपको बताएंगे कि योगासनों में से सर्वश्रेष्‍ठ माने जाने वाला योगासन 'सूर्य नमस्कार' कैसे करते हैं ?, सूर्य नमस्कार के  क्या फायदे और महत्व हैं ?, कितने तरह के होते हैं आसन ? और किन मंत्रों के साथ किया जाता है सूर्य नमस्‍कार ?

सूर्यनमस्कार कैसे करते हैं ?
सूर्यनमस्कार में कुल 12 आसन किये जाते हैं। इसमें की जानेवाली 12 शारीरिक स्तिथियों का संबंध 12 राशियों से होने के दावा भी किया जाता हैं। सूर्यनमस्कार करने का सबसे शुभ समय सूर्योदय का होता हैं। अगर संभव हो तो इसे सूर्य की तरफ मुख कर स्वच्छ हवादार स्थान करने से ज्यादा लाभ होता हैं। सूर्यास्त के समय भी यह किया जा सकता हैं। समय न मिलने पर, इसे दिन में किसी भी समय किया जा सकता है पर आपका पेट खाली होना आवश्यक हैं।

सूर्य नमस्कार का अभ्यास बारह बारह शक्तिशाली योग मुद्राओं में किया जाता है, जो निम्नलिखित है;

(1) सूर्य नमस्कार प्रथम योग मुद्रा (प्रणामासन):

प्रथम स्थिति- स्थितप्रार्थनासन
मंत्र: ॐ मित्रायनमः

दोनों हाथों को जोड़कर सीधे खड़े हों। नेत्र बंद करें। ध्यान ‘आज्ञा चक्र’ पर केंद्रित करके ‘सूर्य भगवान’ का आह्वान ‘ॐ मित्राय नमः’ मंत्र के द्वारा करें।

(2) सूर्य नमस्कार द्वतीय योग मुद्रा (हस्तोत्थानासन):

द्वितीय स्थिति - हस्तोत्तानासन या अर्द्धचन्द्रासन
मंत्र: ॐ रवयेनमः

श्वास भरते हुए दोनों हाथों को कानों से सटाते हुए ऊपर की ओर तानें तथा भुजाओं और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं। ध्यान को गर्दन के पीछे ‘विशुद्धि चक्र’ पर केन्द्रित करें।

(3) सूर्य नमस्कार त्रित्ये योग मुद्रा (हस्तपादासन):

तृतीय स्थिति - हस्तपादासन या पादहस्तास
मंत्र: ॐ सूर्यायनमः

तीसरी स्थिति में श्वास को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकाएं। हाथ गर्दन के साथ, कानों से सटे हुए नीचे जाकर पैरों के दाएं-बाएं पृथ्वी का स्पर्श करें। घुटने सीधे रहें। माथा घुटनों का स्पर्श करता हुआ ध्यान नाभि के पीछे ‘मणिपूरक चक्र’ पर केन्द्रित करते हुए कुछ क्षण इसी स्थिति में रुकें। कमर एवं रीढ़ के दोष वाले साधक न करें।

(4) सूर्य नमस्कार चतुर्थ योग मुद्रा (एकपाद प्रसारणासन):

चतुर्थ स्थिति- एकपादप्रसारणासन
मंत्र:
 ॐ भानवेनमः

इसी स्थिति में श्वास को भरते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं। छाती को खींचकर आगे की ओर तानें। गर्दन को अधिक पीछे की ओर झुकाएं। टांग तनी हुई सीधी पीछे की ओर खिंचाव और पैर का पंजा खड़ा हुआ। इस स्थिति में कुछ समय रुकें। ध्यान को ‘स्वाधिष्ठान’ अथवा ‘विशुद्धि चक्र’ पर ले जाएँ। मुखाकृति सामान्य रखें।

(5) सूर्य नमस्कार पंचम योग मुद्रा (दण्डासन):

पंचम स्थिति- भूधरासन या दण्डासन
मंत्र:
 ॐ खगायनमः

श्वास को धीरे-धीरे बाहर निष्कासित करते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं। दोनों पैरों की एड़ियां परस्पर मिली हुई हों। पीछे की ओर शरीर को खिंचाव दें और एड़ियों को पृथ्वी पर मिलाने का प्रयास करें। नितम्बों को अधिक से अधिक ऊपर उठाएं। गर्दन को नीचे झुकाकर ठोड़ी को कण्ठकूप में लगाएं। ध्यान ‘सहस्रार चक्र’ पर केन्द्रित करने का अभ्यास करें।

(6) सूर्य नमस्कार छठ योग मुद्रा (अष्टाङ्ग नमस्कार आसन):

षष्ठ स्थिति - साष्टाङ्ग प्रणिपात
मंत्र:
 ॐ पूष्णेनमः

श्वास भरते हुए शरीर को पृथ्वी के समानांतर, सीधा साष्टांग दण्डवत करें और पहले घुटने, छाती और माथा पृथ्वी पर लगा दें। नितम्बों को थोड़ा ऊपर उठा दें। श्वास छोड़ दें। ध्यान को ‘अनाहत चक्र’ पर टिका दें। श्वास की गति सामान्य करें। सूर्यनमस्कार व श्वासोच्छवास

(7) सूर्य नमस्कार सप्तम योग मुद्रा (भुजङ्गासन):

सप्तम स्थिति - सर्पासन या भुजङ्गासन
मंत्र:
 ॐ हिरण्यगर्भायनमः

इस स्थिति में धीरे-धीरे श्वास को भरते हुए छाती को आगे की ओर खींचते हुए हाथों को सीधे कर दें। गर्दन को पीछे की ओर ले जाएं। घुटने पृथ्वी का स्पर्श करते हुए तथा पैरों के पंजे खड़े रहें। मूलाधार को खींचकर वहीं ध्यान को टिका दें।

(8) सूर्य नमस्कार अष्ठम योग मुद्रा (अधोमुक्त श्वानासन):

अष्टम स्थिति- पर्वतासन
मंत्र:
 ॐ मरीचयेनमः

श्वास को धीरे-धीरे बाहर निष्कासित करते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं। दोनों पैरों की एड़ियां परस्पर मिली हुई हों। पीछे की ओर शरीर को खिंचाव दें और एड़ियों को पृथ्वी पर मिलाने का प्रयास करें। नितम्बों को अधिक से अधिक ऊपर उठाएं। गर्दन को नीचे झुकाकर ठोड़ी को कण्ठकूप में लगाएं। ध्यान ‘सहस्रार चक्र’ पर केन्द्रित करने का अभ्यास करें।

(9) सूर्य नमस्कार नवम योग मुद्रा (अश्व संचालनासन):

नवम स्थिति - एकपादप्रसारणासन या अश्व संचालनासन
मंत्र:
 ॐ आदित्यायनमः

इसी स्थिति में श्वास को भरते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं। छाती को खींचकर आगे की ओर तानें। गर्दन को अधिक पीछे की ओर झुकाएं। टांग तनी हुई सीधी पीछे की ओर खिंचाव और पैर का पंजा खड़ा हुआ। इस स्थिति में कुछ समय रुकें। ध्यान को ‘स्वाधिष्ठान’ अथवा ‘विशुद्धि चक्र’ पर ले जाएँ। मुखाकृति सामान्य रखें।

(10) सूर्य नमस्कार दसम योग मुद्रा (उत्थानासन):

दशम स्थिति – हस्तपादासन
मंत्र:
 ॐ सवित्रेनमः

तीसरी स्थिति में श्वास को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकाएं। हाथ गर्दन के साथ, कानों से सटे हुए नीचे जाकर पैरों के दाएं-बाएं पृथ्वी का स्पर्श करें। घुटने सीधे रहें। माथा घुटनों का स्पर्श करता हुआ ध्यान नाभि के पीछे ‘मणिपूरक चक्र’ पर केन्द्रित करते हुए कुछ क्षण इसी स्थिति में रुकें। कमर एवं रीढ़ के दोष वाले साधक न करें।

(11) सूर्य नमस्कार ग्यारवी योग मुद्रा (हस्तोत्थानासन):

एकादश स्थिति -हस्तोत्तानासन या अर्धचन्द्रासन
मंत्र
: ॐ अर्कायनमः

श्वास भरते हुए दोनों हाथों को कानों से सटाते हुए ऊपर की ओर तानें तथा भुजाओं और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं। ध्यान को गर्दन के पीछे ‘विशुद्धि चक्र’ पर केन्द्रित करें।

(12) सूर्य नमस्कार बारवी योग मुद्रा (प्रणामासन):

द्वादश स्थिति -स्थित प्रार्थनासन
मंत्र:
 ॐ भास्करायनमः

यह स्थिति – पहली स्थिति की भाँति रहेगी। सूर्य नमस्कार की उपरोक्त बारह स्थितियाँ हमारे शरीर को संपूर्ण अंगों की विकृतियों को दूर करके निरोग बना देती हैं।

 


 

सूर्य नमस्कार के फायदे और महत्व हैं :

भले ही आप योगासन करते हो या नहीं पर अगर आपने सभी योगासनों में से सर्वश्रेष्‍ठ योगासन 'सूर्य नमस्कार' कर लिया तो समझिए मानव शरीर के सारे रोगों का निवारण हो जाएगा। सूर्य नमस्‍कार करने के अनगिनत फायदे हैं। आइये जानते हैं कि सूर्य नमस्‍कार करने से हमारे शरीर को क्या फायदा पहुंचता है:

तनाव दूर होता है: सूर्य नमस्‍कार करते वक्‍त लंबी सांस भरनी चाहिये, जिससे शरीर रिलैक्‍स हो जाता है। इसे करने से बेचैनी और तनाव दूर होता है तथा दिमाग शांत होता है।

पाचन क्रिया में सुधार: सूर्य नमस्‍कार करने से पाचन क्रिया में सुधार होता है। इससे खाना पचाने वाला रस ज्‍यादा मात्रा में निकलता है और पेट में छुपी गैस बाहर निकल जाती है, जिससे पेट हमेशा हल्‍का बना रहता है।

वजन कम होता है: सूर्य नमस्‍कार करने से शरीर के हर भाग पर जोर पड़ता है, जिससे वहां की चर्बी धीरे धीरे गलने लगती है। अगर आप मोटे हैं तो सूर्य नमस्‍कार रोज करें।

लचीलापन आता है: सूर्य नमस्‍कार करने से शरीर में अकड़न कम हो जाती है और शरीर में लचक पैदा होने लगती है। यह एक बहुत ही अच्‍छा व्‍यायाम है।

अनिंद्रा दूर होती है: लोगों में अनिंद्रा की समस्‍या आम हो गई है तो ऐसे मे सूर्य नमस्‍कार जरुर करना चाहिये। इससे शरीर रिलैक्‍स हो जाता है, जिससे रात को अच्‍छी नींद आती है।

हड्डियां मजबूत होता हैं: सूरज के सामने सूर्य नमस्‍कार करने से शरीर में विटामिन डी जाता है, जिससे खूब सारा कैल्‍शियम हड्डियों दृारा सोख लिया जाता है।

पीरियड्स रेगुलर होते हैं: कई महिलाओं में अनियमित पीरियड्स होते हैं जो कि सूर्य नमस्‍कार को नियमित रूप से करने से ठीक हो जाता है। यह हार्मोन को भी बैलेंस करता है।

खूबसूरत त्‍वचा बनाता है: इसे नियमित रूप से करने पर शरीर में खून का दौरा तेज होने के साथ पेट भी सही रहता है। साथ ही चेहरे से झुर्रियां मिट जाती हैं।

शारीरिक मुद्रा में सुधार आता है: कई लोग झुक कर चलते व बैठते हैं, जिससे उनके शरीर की पूरी बनावट खराब दिखती है। लेनिक सूर्य नमस्‍कार करने से अंदर से शारीरिक सुधार होने लगता है। इससे शरीर का सारा दर्द भी खतम हो जाता है।

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